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तुझे कब से पुकारे तेरा लाल

माँ शेरोवाली आजा मेहरो वाली, तुझे कब से पुकारे तेरा लाल आजा माँ शेरोवाली वारु तुझपे मैं पूजा के थाल आजा माँ शेरो वाली माँ शेरोवाली आजा मेहरो वाली लगते है झूठे माँ सहारे सरे जग के रोना है मुझे तेरे चरणों से लग के मेरे अनसु कहे गे मेरा हाल आजा माँ शेरोवाली भक्ति में तेरी मैंने जीवन की शाम की पल पल जपी है मैया माला तेरे नाम की मेरी भक्ति का कर के ख्याल आजा मा शेरो वाली वारु तुझपे मैं पूजा के थाल,आजा माँ शेरो वाली

निर्धन के घर भी आ जाना

कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना | जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना || ना छत्र बना सका सोने का, ना चुनरी घर मेरे टारों जड़ी | ना पेडे बर्फी मेवा है माँ, बस श्रद्धा है नैन बिछाए खड़े || इस श्रद्धा की रख लो लाज हे माँ, इस विनती को ना ठुकरा जाना | जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना || जिस घर के दिए मे तेल नहीं, वहां जोत जगाओं कैसे | मेरा खुद ही बिशोना डरती माँ, तेरी चोंकी लगाऊं मै कैसे || जहाँ मै बैठा वही बैठ के माँ, बच्चों का दिल बहला जाना | जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना || तू भाग्य बनाने वाली है, माँ मै तकदीर का मारा हूँ | हे दाती संभाल भिकारी को, आखिर तेरी आँख का तारा हूँ || मै दोषी तू निर्दोष है माँ, मेरे दोषों को तूं भुला जाना | जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ||

ले के पूजा की थाली ज्योत मन की जगाली

भजन गंगा ×Bhajan Ganga प्रथम पन्ना home कृष्ण भजन krishna bhajans शिव भजन shiv bhajans हनुमान भजन hanuman bhajans साईं भजन sai bhajans जैन भजन jain bhajans दुर्गा भजन durga bhajans गणेश भजन ganesh bhajans राम भजन raam bhajans गुरुदेव भजन gurudev bhajans विविध भजन miscellaneous bhajans विष्णु भजन vishnu bhajans बाबा बालक नाथ भजन baba balak nath bhajans देश भक्ति भजन patriotic bhajans खाटू श्याम भजन khatu shaym bhajans रानी सती दादी भजन rani sati dadi bhajans बावा लाल दयाल भजन bawa lal dayal bhajans शनि देव भजन shani dev bhajans आज का भजन bhajan of the day भजन जोड़ें add bhajans Get it on Google Play ले के पूजा की थाली ज्योत मन की जगाली ले के पूजा की थाली, ज्योत मन की जगाली, तेरी आरती उतारूँ, भोली माँ । तू जो दे दे सहारा, सुख जीवन का सारा, तेरे चरणों पे वारुण, भोली माँ ॥ धूल तेरे चरणों की ले कर माथे तिलक लगाया । यही कामना लेकर मैया द्वारे तेरे मैं आया । रहूँ मैं तेरा हो के, तेरी सेवा में खो के, सारा जीवन गुजारूं, भोली माँ ॥ सफल हुआ यह जनम के मैं था जन्मो से कंगाल । तुने भक्ति का ...

क्षमा करो अपराध, शरण माँ आया हूँ

क्षमा करो अपराध, शरण माँ आया हूँ माता वैष्णो द्वार मै झुकायाँ हूँ देवों के सब संकट तारे रक्त बीज मधु केट्भ मारे शुम्भ अशुम्भ असुर संघारे किया भगत कल्याण, शरण माँ आया हूँ बालकपन खेलों में गवायाँ योवन विषयों में भरमाया बुढापन कुछ काम न आया जीवन सफल बनाओ, शरण माँ आया हूँ धन योवन का साथ नहीं है विदयाधन कुछ पास नहीं है नाम बड़ा नहीं काम बड़ा नहीं नहीं बड़ा कुल धाम, शरण माँ आया हूँ धर्म मार्ग मुझको न सुहाते सदा कुमार्ग मुझको भाते मन चंचल तेरा ध्यान न करता बड़ा चबल नादान, शरण माँ आया हूँ घर बहार से हूँ ठुकराया विषयों मैं भटका घबराया समय गवां कर मैं पछताया विषय सर्प मन दशा, शरण माँ आया हूँ माँ विपदा ने मुझे हैं घेरा बिन तेरे अब कोई न मेरा दिन बंधू माँ नाम है तेरा करो सफल निज धाम, शरण माँ आया हूँ क्षमा करो अपराध, शरण माँ आया हूँ माता वैष्णो द्वार मै झुकायाँ हूँ

श्री दुर्गा चालीसा

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ॐ सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ श्री दुर्गा चालीसा नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥ शशि ललाट मुख महाविशाला । नेत्र लाल भृकुटी बिकराला ॥ रूप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ॥ तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ अन्नपूर्णा तुम जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥ प्रलयकाल सब नाशनहारी । तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥ शिव योगी तुम्हरे गुन गावें । ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥ रूप सरस्वती का तुम धारा । दे सुबुधि ऋषि-मुनिन उबारा ॥ धर्‍यो रूप नरसिंह को अम्बा । परगट भईं फाड़ कर खम्बा ॥ रक्षा करि प्रहलाद बचायो । हिरनाकुश को स्वर्ग पठायो ॥ लक्ष्मी रूप धरो जग जानी । श्री नारायण अंग समानी ॥ क्षीरसिन्धु में करत बिलासा । दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी । महिमा अमित न जात बखानी ॥ मातंगी धूमावति माता । भुवनेश्वरि बगला सुखदाता ॥ श्री भैरव तारा जग-तारिणि । छिन्न-भाल भव-दुःख निवारिणि ॥ केहरि वाहन ...

शारदीय नवरात्रि : आ रही है मां, मनचाहे वरदानों से भरिए अपनी खाली झोली

मां के स्वागत के दिन आ गए हैं। इस साल नवरात्रि 10 अक्टूबर से शुरू हो रही है। मां की आराधना का यह उत्सव इस साल दिनों का है। सालों बाद नवरात्रि में दस दिन तक मां की भक्ति कर मन चाहे वरदान पाने का मौका हम सभी के पास है। नवरात्रि में हम शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की पूजा करते हैं। चैत्र के साथ अश्विन नवरात्रि का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्रि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह नवरात्रि पर्व दशहरे से ठीक पहले हैं और पूरा महीना ही त्योहारी सीजन से भरपूर है। महानवरात्रि के नौ दिनों में मां के अलग–अलग रुपों – मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री मां की शक्ति पूजा की जाती है। घटस्थापना नवरात्रि के पहले दिन होती है। 9 दिनों तक मां के लिए की जाने वाली पूजा और उपवास 10वें दिन कन्या पूजन के साथ खोला जाता है। नवरात्रि शुरुआत – 10 अक्टूबर (बुधवार) 2018 महाअष्टमी– 17 अक्टूबर महानवमी– 18 अक्टूबर (गुरुवार) 2018 नवरात्रि दौरान घर में घट स्थापना और पूजा विधि– नवरात्रि घट स्थापना समय नवरात्रि घट स्थापना मुहूर्त 2018 – 06:18:40 स...

नवरात्रि नवमी- माँ सिद्धिधात्री की उपासना का दिन

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देवी के 9वें स्वरुप में मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है, जो दरसल देवी का पूर्ण स्वरुप है. केवल इस दिन मां की उपासना करने से, सम्पूर्ण नवरात्रि की उपासना का फल मिलता है. यह पूजा नवमी तिथि पर की जाती है. महानवमी पर शक्ति पूजा भी की जाती है, जिसको करने से निश्चित रूप से विजय की प्राप्ति होती है. आज के दिन महासरस्वती की उपासना भी होती है, जिससे अद्भुत विद्या और बुद्धि की प्राप्ति हो सकती है. इस बार देवी के 9वें स्वरुप की पूजा 29 सितम्बर को की जाएगी. मां सिद्धिदात्री का स्वरुप नवदुर्गा में मां सिद्धिदात्री का स्वरुप अंतिम और 9वां स्वरुप है. यह समस्त वरदानों और सिद्धियों को देने वाली हैं. यह कमल के पुष्प पर विराजमान हैं और इनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म है. यक्ष, गंधर्व, किन्नर, नाग, देवी-देवता और मनुष्य सभी इनकी कृपा से सिद्धियों को प्राप्त करते हैं. इस दिन मां सिद्धिदात्री की उपासना करने से नवरात्रि के 9 दिनों का फल प्राप्त हो जाता है. महत्व मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी सिद्धियां प्रदान करने वाली हैं. देवीपुराण में भी लिखा है की भगवान शिव को इनकी कृपा से ही सभी ...

नवरात्रि अष्ठमी- माँ महागौरी माता का दिन

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नवरात्रि अष्टमी-माँ महागौरी नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान अष्टमी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी रूप का पूजन किया जाता है। सुंदर, अति गौर वर्ण होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है। महागौरी की आराधना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं, समस्त पापों का नाश होता है, सुख-सौभाग्य की प्राप्‍ति होती है और हर मनोकामना पूर्ण होती है। जय माता दी

नवरात्रि सप्तमी- माँ कालरात्रि माता का दिन

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नवरात्रि सप्तम दिन-माता कालरात्रि श्री दुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। संसार में कालो का नाश करने वाली देवी ‘कालरात्री’ ही है। भक्तों द्वारा इनकी पूजा के उपरांत उसके सभी दु:ख, संताप भगवती हर लेती है। दुश्मनों का नाश करती है तथा मनोवांछित फल प्रदान कर उपासक को संतुष्ट करती हैं।

नवरात्रि छठा दिन- माँ कात्यायनी का दिन

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नवरात्रि छठा दिन- नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। कात्य गोत्र में विश्व प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो। तब मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसलिए यह देवी कात्यायनी कहलाईं। मन्त्र- चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥ फल- इस देवी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

नवरात्रि पंचम दिन- स्कन्द माता का दिन

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नवरात्र पांचवां दिनः स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय यानी स्‍कन्‍द कुमार की माता होने के कारण दुर्गाजी के इस पांचवें स्‍वरूप को स्‍कंदमाता कहा जाता है। देवी के इस स्वरूप मेंभगवान स्‍कंद बालरूप में माता की गोद में विराजमान हैं। माता के इस स्‍वरूप की 4 भुजाएं हैं। शुभ्र वर्ण वाली मां कमल के पुष्‍प पर विराजित हैं। इसी कारण इन्‍हें पद्मासना और विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है। स्‍कंदमाता को सौरमंडल की अधिष्‍ठात्री देवी माना जाता है। एकाग्रता से मन को पवित्र करके मां की आराधना करने से व्‍यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। स्‍कंदमाता का मंत्र सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया | शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी || या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

नवरात्रि चौथा दिन-माँ कूष्माण्डा माता

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नवरात्रि चौथा दिन- कूष्मांडा माता देवी पुराण में बताया गया है कि सृष्टि के आरंभ से पहले अंधकार का साम्राज्य था। उस समय आदि शक्ति जगदम्बा देवी कूष्मांडा के रुप में वनस्पतियों एवं सृष्टि की रचना के लिए जरूरी चीजों को संभालकर सूर्य मण्डल के बीच में विराजमान हो गई थी। जै माता दी

नवरात्रि तीसरा दिन- माँ चंद्रघंटा

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नवरात्रि तीसरा दिन-माँ चन्द्रघंटा नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। मां के इस रूप की सच्चे मन से पूजा करने से रोग दूर होते हैं, शत्रुओं से भय नहीं होता और लंबी आयु का वरदान मिलता है। इसके साथ ही मां आध्यात्मिक शक्ति, आत्मविश्वास और मन पर नियंत्रण भी बढ़ाती हैं। मन, कर्म, वचन शुद्ध करके पूजा करने वालों के सब पाप खत्म हो जाते हैं। मंत्र- या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।। जै माता दी

नवरात्रि दूसरा दिन- माँ ब्रम्हचारिणी नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कई हजार वर्षों तक ब्रह्मचारी रहकर घोर तपस्या की थी। उनकी इस कठिन तपस्या के कारण उनका नाम तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी पड़ गया। वे श्वेत वस्त्र पहनती है, उनके दाएं हाथ में जपमाला तथा बाएं हाथ में कमंडल विराजमान है। मंत्र- दधानां करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डल। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। पूजा फल- देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कुंडली में विराजमान बुरे ग्रहों की दशा सुधरती है और व्यक्ति के अच्छे दिन आते हैं। यही नहीं इनकी पूजा से भगवान महादेव भी प्रसन्न होकर भक्त को मनचाहा वरदान देते हैं। जै माता दी

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नवरात्रि दूसरा दिन- माँ ब्रम्हचारिणी नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कई हजार वर्षों तक ब्रह्मचारी रहकर घोर तपस्या की थी। उनकी इस कठिन तपस्या के कारण उनका नाम तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी पड़ गया। वे श्वेत वस्त्र पहनती है, उनके दाएं हाथ में जपमाला तथा बाएं हाथ में कमंडल विराजमान है। मंत्र- दधानां करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डल। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। पूजा फल- देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कुंडली में विराजमान बुरे ग्रहों की दशा सुधरती है और व्यक्ति के अच्छे दिन आते हैं। यही नहीं इनकी पूजा से भगवान महादेव भी प्रसन्न होकर भक्त को मनचाहा वरदान देते हैं। जै माता दी

नवरात्रि विशेष -प्रथम नवदुर्गा: माता शैलपुत्री देवी दुर्गा के नौ रूप होते है | देवी दुर्गा ज़ी के पहले स्वरूप को "माता शैलपुत्री" के नाम से जाना जाता है | ये ही नवदुर्गाओ मे प्रथम दुर्गा है | शैलराज हिमालय के घर पुत्री रूप मे उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा | नवरात्र पूजन मे प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा ओर उपासना की जाती है | माता शैलपुत्री का उपासना मंत्र वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ पूजा फल: मान्यता है कि माता शैलपुत्री की भक्तिपूर्वक पूजा करने से मनुष्य कभी रोगी नहीं होता। जै माता दी

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प्रथम नवदुर्गा: माता शैलपुत्री देवी दुर्गा के नौ रूप होते है | देवी दुर्गा ज़ी के पहले स्वरूप को "माता शैलपुत्री" के नाम से जाना जाता है | ये ही नवदुर्गाओ मे प्रथम दुर्गा है | शैलराज हिमालय के घर पुत्री रूप मे उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा | नवरात्र पूजन मे प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा ओर उपासना की जाती है | माता शैलपुत्री का उपासना मंत्र वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ पूजा फल: मान्यता है कि माता शैलपुत्री की भक्तिपूर्वक पूजा करने से मनुष्य कभी रोगी नहीं होता। जै माता दी